योग भगाए अपराध 'रोग': कातिल बने योग गुरु, कैदियों में बदलाव की अनूठी कहानी

2017-07-06 10:06:27

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सेंट्रल जेल में 60 ऐसे कैदियों को योग टीचर बनाया गया, जिनका छह महीने की ट्रेनिंग में अच्छा प्रदर्शन रहा था. छह महीने की ट्रेनिंग में सिलेक्ट होने के बाद आठ दिन की स्पेशल योग ट्रेनिंग लेकर कैदियों को योग टीचर की उपाधि दी गई. इन योग टीचरों में सबसे ज्यादा हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी शामिल है.

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के डीआईजी राजकिशोर, स्वास्थ्य विभाग के अफसर डॉक्टर लोकेंद्र सिंह, इंटरनेशनल योग टीचर तारिक खान समेत उनकी टीम ने कैदियों को योग की शिक्षा दी.
छह महीने तक चली ट्रेनिंग में 1200 कैदियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन इन कैदियों में से केवल 60 कैदियों को सिलेक्ट किया गया. इन्हीं सिलेक्ट कैदियों को आठ दिन की स्पेशल ट्रेनिंग देकर योग टीचर बनाया गया.

कैदियों की परीक्षा भी ली गई. सामाजिक संस्थान की परीक्षा में पास होने के बाद ही 60 कैदियों को योग टीचर का प्रमाण पत्र दिया गया.जेल प्रबंधन बीते कई सालों से कैदियों के लिए योग के प्रोग्राम चला रहा है. लेकिन ये पहला मौका है, जब किसी सामाजिक संस्थान के साथ मिलकर स्पेशल ट्रेनिंग देकर कैदियों को योग टीचर बनाया जा रहा है.

जेल में बंद उम्र कैद की सजा काट रहे कैदियों के अलावा भी कई ऐसे कैदी हैं, जिन्होंने हेराफेरी कर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला था. लेकिन आज यही 420 कैदी योग टीचर बनकर जीवन में नए बदलाव की बात कर रहे हैं.

सेंट्रल जेल के 60 कैदी बने योग टीचर अब दूसरे कैदियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. ट्रेनिंग की शुरूआत योग शिक्षकों ने अपनी ही सेंट्रल जेल से शुरू की है. सेंट्रल जेल के बाद जेल मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद ये कैदी दूसरी जेलों में भी योग की ट्रेनिंग देंगे. जेल में अपने ही कैदी भाइयों से योग की ट्रेनिंग लेने से कैदियों में खुशी का माहौल है.

प्रदेश की जेलों के इतिहास में ये पहला मौका है, जब इतनी बड़ी संख्या में कैदियों को योग टीचर बनने का मौका दिया गया. योग टीचर बनने के बाद अब कैदी दूसरे कैदियों को योग की ट्रेनिंग देकर जेल की चार दीवारों के बीच जीवन जीने की नई कला सिखा रहे हैं.














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