ये हैं वो 7 वजह, हमला करने से पहले 100 बार सोचेगा 'ड्रैगन'

2017-07-06 09:56:45

सिक्किम में सीमा पर गतिरोध के बाद चीन और भारत के बीच तनाव बढ़ गया है. चीन ने जहां 1962 की जंग का हवाला दिया तो भारत ने भी कहा कि साल 2017 का भारत उस समय जैसा नहीं है. चीन ने जहां 1979 के वियतनाम युद्ध के बाद कोई युद्ध नहीं लड़ा है. वहीं भारत 1962 के बाद तीन जंग लड़कर जीत चुका है.

14 पड़ोसी देशों में ज्यादातर के साथ सीमा विवाद में उलझा चीन भारत के साथ जंग की हालात में अपनी पूरी सैन्य क्षमता नहीं झोंक सकता. चीन डर दिखाकर ही साउथ चाइना सी में लगातार कब्जा कर रहा है. लेकिन एक ऐसा ही डर उसे भारत से भी है. आइए जानते हैं वो कौन सी वजहें हैं, भारत पर हमला करने से पहले चीन सौ बार सोचेगा.

वायुसेना
चीन के पास भारत से ज्यादा लड़ाकू विमान हैं. लेकिन भारतीय लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमआई की उसके पास कोई काट नहीं. यह चीन के सुखोई 30 एमकेएम से काफी ताकतवर है. भारतीय सुखोई 30 जहां एक साथ 30 निशाने साध सकता है, वहीं चीनी सुखोई 30 सिर्फ दो निशाने साध सकता है.

भौगोलिक स्थिति
भारत और चीन बॉर्डर की भौगोलिक स्थिति भारत के पक्ष में है. जंग होने पर चीनी विमानों को तिब्बत के ऊंचे पठार से उड़ान भरनी होगी. ऐसे में न तो चीनी विमानों में ज्यादा विस्फोटक लादे जा सकते हैं और न ही ज्यादा ईंधन भरे जा सकते हैं. चीनी वायुसेना विमानों में हवा में ईंधन भरने में भी उतना सक्षम नहीं है. जंग की स्थिति में चीन के जे-11 ए और जे-10 विमान चेंग डू सैन्य क्षेत्र से उड़ान भरेंगे.

वहीं भारत ने असम के तेजपुर में सुखोई 30 का बेस बनाया हुआ है. जंग की स्थिति में विमान यहां से तेजी से उड़ान भर सकेंगे.

ब्रह्मोस की भूमिका
भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस बनाया है. 952 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलने वाली ब्रह्मोस चीन के रडारों को मात देकर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. ब्रह्मोस का उत्पादन भारत में होने के चलते युद्ध के वक्त इसकी सप्लाई बनी रहेगी.

वहीं, चीन के पास मौजूद बैलेस्टिक मिसाइल DF-11, DF-15 और DF-21 की भारत के पास कोई काट नहीं है. भारत के पास सटीक एअर डिफेंस सिस्टम की कमी के चलते यह उत्तर भारतीयों शहरों में तबाही फैला सकती है.

हालांकि इसके जवाब में भारत के पास भी बीजिंग तक मारक क्षमता वाली अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं. ऐसे में चीन कभी भी जंग की शुरुआत में इसे मिसाइल युद्ध में बदलने की कोशिश नहीं करेगा.

चीन की तेजी
भारत-चीन के बीच युद्ध की आशंका पर रिसर्च करने वाले अमरीकी स्कॉलर इस्कंदर रहमान ने अपने रिसर्च पेपर में भारतीय फौज के एक कर्नल के हवाले से लिखा है, भारत यह जानता है कि एक बार चीनी सेना किसी भू-भाग पर कब्जा कर ले तो उसे पीछे धकेलने के लिए बहुत खून बहाना पड़ेगा. ऐसे में भारतीय सेना की रणनीति चीनी भू-भाग पर कब्जा करने की रहेगी.

भारत-चीन सीमा पर सिक्किम और लद्दाख के इलाके ऐसे हैं जहां भारत, भौगोलिक रूप से अच्छी पोजिशन में है. लिहाजा इन इलाकों से भारतीय सीमा आगे बढ़कर चीनी क्षेत्रों पर कब्जा कर सकती है. खास तौर से तिब्बत के वेस्टर्न हाइवे को निशाना बनाया जा सकता है.

स्पेश लड़ाकू दोस्त
भारत चीन सीमा पर भारतीय सेना ने जहां सीमा के नजदीक निचले इलाके में अपना बेस बनाया है, वहीं चीनी सेना सीमा से दूर तिब्बत के अंदरूनी इलाकों से आएगी. तिब्बत में सड़क-रेल नेटवर्क बेहतरीन होने के कारण वह कम समय में सेना के कई डिवीजन सीमा पर भेज सकता है.

भारत को भी अपनी सेना जल्द से जल्द सीमा पर पहुंचाने की कोशिश करनी होगी. एअर फोर्स और ब्रह्मोस के अलावा विशेष लड़ाकू दस्तों का भी इस्तेमाल करना होगा.

'गुप्त' स्पेशल फ्रंटियर फोर्स
भारत के पास स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएसएफ) नाम का लड़ाकू दस्ता है. यह तिब्बत में घुसकर नुकसान करने की स्थिति में होगा. तिब्बती शरणार्थियों के इस दस्ते में के बाद ज्याद कुछ किसी को जानकारी नहीं है. यह सीधे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के अधीन है.

चीन की सप्लाई रोक सकती है भारतीय सेना
हिंद महासागर में भारत की स्थिति काफी मजबूत है. भारतीय नौ सेना बड़ी आसानी से यूरोप, मध्यपूर्व और अफ्रीका के साथ चीन के रास्ते की नाकेबंदी कर सकती है.चीन 87 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते आयात करता है. आईएनएस विक्रमादित्य की अगुवाई में भारतीय नौसेना इस नाकेबंदी को और मजबूत कर रही है.















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