ग्वालियर हैरीटेज सर्किट के कार्यों में समन्वय के साथ कार्य करें – कलेक्टर

2017-05-19 11:01:48

ग्वालियर |  “स्वदेश दर्शन योजना” के अंतर्गत ग्वालियर शहर के हैरीटेज सर्किट को विकसित करने के लिये ग्वालियर के पुरातात्विक स्थलों पर कराए जाने वाले कार्य समय-सीमा में उत्तम गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ। इसके लिये मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और नगर निगम आपसी समन्वय से कार्य करे। यह निर्देश कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने ग्वालियर हैरीटेज सर्किट के अंतर्गत 26 करोड़ रूपए की लागत से कराए जाने वाले कार्यों की समीक्षा के दौरान दिए। 
बैठक में मध्यप्रदेश टूरिज्‍म विकास निगम की अतिरिक्त प्रबंध निदेशक सुश्री तनवी सुंद्रयाल, नगर निगम आयुक्त अनय द्विवेदी सहित टूरिज्म विकास निगम और नगर निगम के अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. गोयल ने कहा कि देश और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा “स्‍वदेश दर्शन योजना” प्रारंभ की गई है। जिसके माध्यम से ऐसे सभी स्थल जिनमें देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है, उन स्थानों को इस योजना के माध्यम से संरक्षित करने का काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा मुरैना से लेकर ओरछा तक के हैरीटेज सर्किट को विकसित करने के लिये 99 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। जिसमें से 26 करोड़ रूपए के कार्य चंबल गोल्डन ट्रंगुलर पर खर्च किए जायेंगे। इसका केन्द्र ग्वालियर को बनाया गया है। इसके अंतर्गत शहर के जिन प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को नया स्वरूप दिया जाना है, उनके कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि जो भी निर्माण कार्य प्रस्तावित किए जाएँ, उनसे संबंधित भवन या स्ट्रक्चर का पुरातात्विक स्वरूप बाधित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी स्थलों पर पार्किंग और अन्य जन-सुविधाओं को विकसित करने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने कहा कि बैजाताल में स्वच्छ पानी के लिये बनाए जाने वाले सीवर ट्रीटमेंट प्लान (एसटीपी) का कार्य नगर निगम द्वारा कराया जाए। इसके लिये टूरिज्म विभाग राशि उपलब्ध करायेगा। उन्होंने कहा कि जिन भवनों या स्थलों पर कार्य कराए जाना है, टूरिज्म विभाग उनसे अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के उपरांत ही कार्य प्रारंभ कराए। सुश्री सुंद्रयाल ने बताया कि ग्वालियर-चंबल हैरीटेज सर्किट के अंतर्गत ग्वालियर में जो काम कराए जाने हैं, उनमें से प्रथम चरण के अंतर्गत बैजाताल, बारादरी, गोपाल मंदिर और महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल को विकसित करने के टेण्डर जारी किए जा चुके हैं। बैजाताल को उसके पुरातात्विक स्वरूप वापस दिलाने के लिये बैजाताल के आस-पास पार्क, पाथवे, तैरते हुए रंगमंच, छतरियों, रैलिंग, दर्शकों के बैठने के लिये बनी हुई सीढियों का जीर्णोद्धार लाईटिंग के लिये सोलर पैनल लगाए जायेंगे। यह सभी काम स्टोनवर्क से किए जायेंगे। इसी क्रम में स्वर्णरेखा पर स्थित बारादरी और उसके आस-पास के क्षेत्र, इटालियन गार्डन को उसके मूल स्वरूप में लाने का काम भी किया जायेगा। यह सभी काम आगामी एक माह के अंदर प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल के समीप बने हुए पार्क को विकसित करने और आने वाले सैलानियों को बैठने के लिये ब्रैंच आदि की व्यवस्था की जायेगी। 
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत मुरैना-ओरछा हैरीटेज सर्किट की 99 करोड़ रूपए की परियोजना में से 26 करोड़ 56 लाख रूपए की लागत से ग्वालियर और मुरैना जिले में निम्न कार्य कराए जायेंगे। जिसके तहत ग्वालियर शहर में बैजाताल के विकास पर 6 करोड़ 4 लाख रूपए, बारादरी के विकास पर एक करोड़ 7 लाख रूपए, इटालियन गार्डन के विकास कार्य पर 3 करोड़ 6 लाख रूपए, गोपाल मंदिर के विकास पर एक करोड़ 5 लाख रूपए, रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के विकास पर एक करोड़ 50 लाख रूपए, तानसेन संगीत संग्रहालय के उन्नयन और नवीनीकरण कार्य पर 3 करोड़ 7 लाख रूपए, ग्वालियर किले में ग्वालियर गेट, उरवाई गेट, सास-बहू का मंदिर, गुरूद्वारा एवं तेली के मंदिर के विकास पर 3 करोड़ 50 लाख 2 हजार रूपए की राशि व्यय की जायेगी।

















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