प‌िता को जबड़े में दबाकर ले जा रहा था बाघ, बेटों ने देखा तो...

2017-08-11 11:05:21

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बाघ के हमले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। पिछले चार दिन में तीन लोगों को बाघ अपना शिकार बना चुका है। इस बीच पीलीभीत में बाघ के आतंक के बीच इंसानी हौसले की कहानी सामने आई है। बताया जाता है कि गुरुवार को बाघ ने इस बार कुंवरसेन नाम के किसान को अपने जबड़े में दबोच लिया था और उसे अपना निवाला बनाने के लिए जंगल की तरफ ले जा रहा था। काफी देर तक बाघ के पंजे में किसान उलझा रहा और इस दौरान बाघ ने जबड़ों और पंजों से किसान पर कई हमले किए। लेकिन इस बीच जो कुछ भी हुआ उसे देखकर किसान के परिजनों और गांववालों रो पड़ें। बाघ के जबड़े से पिता को निकाल लिया लेकिन... 
ग्रामीणों मे बताया बाघ किसान कुंवरसेन को अपने जबड़े में दबा कर जंगल की ओर ले जा रहा था, तो वो जान बचाने की गुहार लगा रहा था। इस दौरान बाघ से भिडऩे की हिम्मत किसी में नहीं हुई। तभी कुंवरसेन के बेटों ने पिता को बाघ के जबरे से बचाने की कोशिश की। दोनों बेटों ने बाघ को घेर लिया और उस पर टूट पड़े। दोनों भाइयों को देख गांववाले भी लाठी-डंडा लेकर मदद को दौड़े। लोगों को आता देख बाघ घबरा गया और शव छोड़कर जंगल में भाग गया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नहीं बच पाया कुंवरसेन
कुंवरसेन के बेटों ने उसे बाघ के जबड़े से छुड़ा तो लिया लेकिन पिता की जान बचा नहीं सके। फिलहाल, पीलीभीत टाइगर रिजर्व से निकले बाघों को टाइगर रिजर्व के अधिकारी कॉमबिंग कर तलाशने में जुटे हुए हैं। वहीं, बाघ चकमा देकर बारी-बारी ग्रामीणों को अपना निवाला बना रहा है। कि पीलीभीत में बाघ ने आतंक मचा रखा है। बाघ बार-बार इंसानों को निशाना बना रहा है। बाघों के आतंक से निपटने के लिए वन संरक्षक विनोद कृष्ण सिंह ने यहां कैंप कर लिया है। बरेली वृत्त से 17 वन कर्मियों जिनमें डिप्टी रेंजर और वन दरोगा शामिल हैं को पीलीभीत बुला लिया गया है। दो उप प्रभागीय वनाधिकारी को भी पीलीभीत तैनात किया गया है। 

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