यह शिवालय लंकेश के भाई विभीषण ने स्थापित करवाया था, अदृश्य शक्ति पट खुलने से पूर्व करती हैं पूजन

2017-07-31 11:58:22

ग्वालियर.  मुरैना से दूर पहाडगढ़ से 14 किमी दूर घने जंगलों में ईसुरा पहाड़ पर बने इस शिवमंदिर में पट खुलते ही पुजारी को शिवलिंग का बेलपत्रों और फूलों से अभिषेक हुआ प्रतिदिन मिलता है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस रामायणकालीन मंदिर की स्थापना लंकेश के भाई विभीषण ने करवाई थी। तब से ही लगातार एक झरने से शिवलिंग के शीर्ष पर जलाभिषेक हो रहा है और ब्रह्म मुहूर्त में कोई सिद्ध शक्ति उपासाना करती है।

पुजारी को प्रतिदिन मिलते शिवलिंग पर चढ़े बेलपत्र 
पहाडग़ढ़ के जंगलों में पहाड़ों के बीच ईश्वरा महादेव का सिद्ध मंदिर बना हुआ है। बारिश के मौसम में यहां प्राकृतिक छटा देखने लायक होती हैए इसलिए यह धार्मिक स्थल के साथ अच्छा पिकनिक स्पॉट है। ग्रामीण बताते हैं कि यहां लंकापति रावण के भाई विभीषण ने इन पहाड़ों के बीच शिवलिंग स्थापित कर तपस्या की थी। तभी से शिवलिंग के शीर्ष पर प्राकृतिक झरना अविरल जलाभिषेक कर रहा है। यहां पुजारी ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोलते हैं,  लेकिन तब तक कोई शिवलिंग का अभिषेक कर चुका होता है। पुजारी को शिव शीर्ष पर बेल पत्र और फूल चढ़े हुए मिलते हैं।

आज तक कोई नहीं जान पायाकौन करता है ब्रह्म मुहुूर्त में पूजन
घने जंगलों में इस शिवलिंग की अंधेरी रात में पूजा कौन करता है इस बारे में कोई नहीं जानता। पुजार व दर्शनार्थियों को शिवलिंग पर अपने.अपने आप बेलपत्र,  फूल,  चावल आदि चढ़े हुए मिलते हैं। अब यहां कुछ पुजारी के साथ कुछ साधु.संत भी रहने लगे हैं, लेकिन शिवलिंग की पूजा कौन करता हैए यह कोई नहीं जान सका।  इस रहस्य को जानने के लिए पहाड़गढ़ के तत्कालीन राजा पंचम सिंह जी ने मंदिर पर रात में दरबान तैनात किये,  लेकिन सुबह वह बेहोशी की हाल में मिले,  और शिवलिंग पर ब्रह्म.मुहूर्त में बेलपत्र कौन चढ़ाता है इस रहस्य को नहीं जान पाए। इसके बाद कई संत महात्माओं ने भी इस रहस्य को जानने की कोशिश की,  लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद ऐन वक्त पर उनको झपकी लगी और पल भर में कोई अनजानी शक्ति शिवाभिषेक कर गई। उनकी आंख खुली तो शिवजी पर पूजा हुई नजर आई।  कोई कहता है कि लंका के राजा विभीषण को सप्त चिरंजीवियों में से एक माना गया है,  और इस शिविलिंग की स्थापना भी उन्होंने ही कराई थी,  इसलिए माना जाता है कि वही आज भी यहां पूजा करने आते हैं।










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